2014 से पहले और बा द का भा रत
An edition of 2014 से पहले और बा द का भा रत (2025)
By Dharmesh Kumar
Publish Date
31 December 2025
Publisher
Dharmesh Kumar
Language
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Pages
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Description:
भूमिभूमिका (Preface) यह कि ता ब क्यों लि खी गई? यह कि ता ब कि सी सरका र के समर्थन में नहीं है। यह कि ता ब कि सी व्यक्ति के वि रो ध में भी नहीं है। यह कि ता ब उस आम भा रती य के सवा लों का दस्ता वेज़ है, जो हर चुना व में वो ट देता है, हर बजट में उम्मी द करता है, और हर सा ल खुद को थो ड़ा और दबा हुआ महसूस करता है। सुबह अख़बा र कहता है — “भा रत वि श्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।” और शा म को वही ना गरि क पूछता है — “तो मेरी ज़िं दगी क्यों नहीं सुधरी ?” यहीं से इस कि ता ब की शुरुआत हो ती है। यह कि ता ब कि सके लि ए है? उस मध्यम वर्ग के लि ए, जि सकी बचत घटी है उस युवा के लि ए, जि सकी डि ग्री है पर नौ करी नहीं उस कि सा न के लि ए, जि सकी फसल है पर दा म नहीं उस महि ला के लि ए, जि सका श्रम दि खता नहीं और उस ना गरि क के लि ए, जो सवा ल पूछना देशद्रो ह नहीं मा नता यह कि ता ब कि सके ख़ि ला फ़ नहीं है? कि सी पा र्टी के नहीं कि सी नेता के नहीं कि सी वि चा रधा रा के नहीं यह कि ता ब सि र्फ़ जवा बदेही के पक्ष में है
subjects: Indian, modi sarkar, Political and social views
People: Dharmesh Kumar - Raopura Naibazar India
Places: Uttar Pradesh (India)
Times: 2024-2025